कुण्डली पर विचार करने की विधि नामक यह पुस्तक ज्योतिष के व्यावहारिक और अनुप्रयुक्ति पर है। इस पुस्तक को जनसाधारण द्वारा पसन्द किया गया है।
इस पुस्तक के दो खण्डों में जन्म कुण्डली के अलग-अलग बारह भावों का विश्लेषण अति वैज्ञानिक ढंग से किया गया है जिसे पढ़कर आप बड़ी सरलता से अलग-अलग भावों के सम्बन्ध में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं। इस पुस्तक को बारह भावों के अनुसार बारह भागों में बाँटा गया है। प्रथम भाग में प्रथम छः भावों के बारे में विस्तृत विवेचन किया गया है और शेष भावों का विवेचन द्वितीय भाग में किया गया है।
इस पुस्तक में भाषा की सरलता और सुबोधगम्यता का पूरा-पूरा ध्यान रखा गया है ताकि भाषा का साधारण ज्ञान रखने वाले को भी विषय को समझने में कठिनाई न हो। कुछ बातों पर अधिक बल दिया गया है और कुछ बातों को एक नवीन ढंग से प्रस्तुत किया गया है। नवीन ढंग का प्रयोग नवांश, चन्द्र कुण्डली आदि अनेक वर्गों का प्रयोग करके किया गया है। प्रस्तुत पुस्तक में विभिन्न वर्गों का प्रयोग करके उदाहरण द्वारा घटनाओं का अति वैज्ञानिक ढंग से विवेचन किया गया है।

























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