Coma Wala Kumbh
जब प्रेम असफल होता है, तो हर व्यक्ति टूटता नहीं। कुछ लोग एक ऐसी यात्रा पर निकल जाते हैं जहाँ से लौटकर वे पहले जैसे नहीं रहते।
एमबीबीएस का छात्र सिद्धार्थ प्रेम में अस्वीकृति, भावनात्मक विघटन और भीतर जमा होते अंधकार के बीच एक ऐसा निर्णय लेता है जो उसे जीवन और मृत्यु की सीमा रेखा तक पहुँचा देता है। उसका शरीर अस्पताल के आइसीयू, में कोमा से जूझ रहा है, लेकिन उसकी चेतना एक दूसरी दुनिया में जाग उठती है-जहाँ वास्तिवकता, स्मृति, स्वप्न, अध्यात्म और मनोविज्ञान की सीमाएँ एक-दूसरे में घुलने लगती है। क्या मन केवल स्मृतियों का घर है, या वह स्वयं एक ब्रह्मांड है?
क्या प्रेम का अंत वास्तव में अंत होता है, या किसी बड़ी यात्रा की शुरुआत ? और क्या कुंभ का यह विराट मेला बाहर लगा है… या सिद्धार्थ के भीतर ?’
कोमा वाला कुंभ प्रेम, पीड़ा, चेतना, अध्यात्म और आत्म- खोज की सीमाओं को छूता हुआ एक अनूठा दार्शनिक उपन्यास है।
डॉ. श्वेता विज्ञान और संवेदना के संगम पर खड़ी एक लेखिका हैं। वह पेशे से डेंटिस्ट हैं, एक कृष्ण-भक्त हैं, कॉफी लवर हैं, आध्यात्मिक खोजी हैं और साथ ही क्वांटम विज्ञान की उत्साही विद्यार्थी भी। फिटनेस उनकी दिनचर्या का हिस्सा है, लेकिन केक के सामने उनका अनुशासन भी कभी-कभी छुट्टी पर चला जाता है।
“कोमा वाला कुंभ” उनके विचारों, अनुभवों, सवालों, मुस्कानों और उन क्षणों का संग्रह है, जहाँ जीवन अक्सर पूर्ण विराम नहीं, बल्कि एक कॉमा लगाकर कुछ नया कहने की तैयारी करता है
























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