Gandhi Bharat Se Pahle
मोहनदास गांधी 1893 में जब दक्षिण अफ्रीका के लिए जहाज़ पर रवाना हुए तो वे 23 साल के एक ऐसे वकील थे जिन्हें भारत में कोई काम नहीं मिल रहा था। जो दो दशक उन्होंने अफ्रीका में बिताए, वे गांधी को महात्मा बनने की राह पर ले गए। इस उल्लेखनीय जीवनी में रामचंद्र गुहा का तर्क है कि गांधी के मूलभूत विचार उनके 1915 में भारत आने के पहले गढ़े जा चुके थे। इग्लैंड और दक्षिण अफ्रीका में रहते हुए वे साम्राज्यवाद के रूप को समझ पाए और दक्षिण अफ्रीका में उन्होंने वो तकनीक और सोच विकसित की जिसने अंततः ब्रितानी साम्राज्य को कमजोर और आखिरकार खत्म किया।
नए दस्तावेजों चार महाद्वीपों में किए गए शोध के आधार पर लिखी गई गाथीः भारत से पहले गांधी का और उनकी दुनिया का जीवंत चित्र प्रस्तुत करती है। एक ऐसी विविधता से भरी दुनिया जिसमें तटीय गुजरात, विक्टोरियाकालीन इंग्लैंड और उपनिवेशकालीन दक्षिण अफ्रीका का पुट था। इसमें गांधी के विभिन्न प्रयोगों की चर्चा है-टॉल्सटॉय और शाकाहार, उग्र सुधारवादी यहूदियों, परंपरा विरोधी ईसाइयों, मुसलमानों से उनकी दोस्ती, उनकी दुश्मनियों और प्रतिद्वंद्विताओं और एक पिता और पति के रूप में उनकी असफलता। ये किताब उस नाटकीय और मर्मस्पर्शी कहानी को बयान करती है जिसमें उन्हें हजारों लोगों की भक्ति हासिल होती है, जब वे समाज के हर तबके और धर्म के लोगों को साथ लेकर एक नस्लवादी, नृशंस सत्ता को अहिंसक आंदोलन के ज़रिए चुनौती देते हैं। गहन शोध और खूबसूरती से लिखी ये किताब इस महान व्यक्तित्व को देखने का हमारा नजरिया बदल देगी।
‘गांधीः भारत से पहले एक जीवनी होने के साथ-साथ एक जीवंत सामाजिक इतिहास भी है’ पैट्रिक फ्रेंच ‘यह किताब रामचंद्र गुहा को गांधी के एक अग्रणी चिंतक के रूप में स्थापित करती हैं द हिंदू
























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