Prachin Bharat Mein Kranti Pratikranti
किसी बात को सिर्फ इसलिए मत मानो कि ऐसा सदियों से होता आया है। विचार, धारणा, परम्परा व विश्वास है या सुनने, देखने, पढ़ने में आई है। इसलिए मत मानो कि धर्मशास्त्रों में लिखा हुआ है या ज्यादातर लोग मानते है। किसी ज्योतिषी, आचार्य, धर्मगुरू की बात को आंख मूंद कर मत मान लेना। किसी बात को सिर्फ इसलिए भी मत मानो कि वह कोई बड़ा या आदरणीय व्यक्ति कह रहा है बल्कि हर बात को पहले तर्क, बुद्धि, विवेक, विज्ञान, प्रज्ञा व अनुभव की कसौटी पर कसना। तोलना और परखना कि वह परम्परा, विचार, विश्वास कहीं लोभ, तृष्णा, घृणा, क्रोध व हिंसा की भावना तो नहीं बढ़ाती है? इंद्रिय सुखों का गुलाम तो नहीं बनाती है? और यदि यह बात स्वयं, मानव समाज एवं सम्पूर्ण प्राणी जगत के हित में लगे, कल्याणकारी लगे, तो ही मानो

























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