Shailush
खानाबदोश नटों के जीवन, संस्कृति, उनकी यायावरी और भावनात्मक पक्ष पर केन्द्रित ‘शैलूष’ शिवप्रसाद सिंह के अत्यन्त चर्चित उपन्यासों में से एक है। इस उपन्यास में जरायमपेशा और हमेशा चलते रहने वाले नटों की जिन्दगी के आँखों देखे विवरणों के साथ उन्होंने अपने शोध व अनुसन्धान से प्राप्त तथ्यों को भी शामिल किया है।
एक कबीलाई जीवन-शैली की यह कथा हमारी कई नैतिक धारणाओं और सामाजिक पूर्वग्रहों को भी तोड़ती है, और हमें एक अलग ढंग के जीवन से परिचित कराती है।
नट समाज के जीवन में आने वाले बाहरी दबावों और उनके अपने दायरे के विभिन्न पहलुओं को समेटते हुए इस उपन्यास में भाषा का प्रयोग भी उपन्यासकार ने अत्यन्त सामर्थ्य के साथ किया है और शिक्षित समाज की दृष्टि को एक ओर रखकर नटों के जीवन की एक प्रामाणिक कथा रची है।
























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