Yun Hi Chalachal Rahi
किसी ज्ञानी ने कहा है कि अगर दुनिया एक किताब है तो भ्रमण न करने वाला सदा उसके पहले पृष्ठ पर ही अटका रहेगा। पर्यटन हमारे दिलो दिमाग की खिड़कियाँ-दरवाजे खोल कर हमें अनुभवों और अनुभूतियों की एक अलग ही दुनिया में पहुंचा देता है। मैं अपने को बहुत सौभाग्यशाली मानती हूँ कि मुझे देश विदेश भ्रमण के बहुत अवसर मिले और उन पलों को मैंने भरपूर जिया। अपनी यात्राओं के ऐसे ही कुछ अनुभवों को मैंने आलेखों के रूप में इस पुस्तक में संकलित किया है। और सिर्फ अनुभव ही नहीं अपितु विभिन्न स्थानों के इतिहास, भूगोल, प्रकृति और उनसे जुड़े दर्शनीय स्थलों के रस से पाठकों को सराबोर करने का प्रयास भी मैंने इस पुस्तक में किया है। आप को यह किताब घर बैठे इन सभी स्थानों और तजुर्बो का मज़ा देगी। और आप अगर इन स्थानों को घूम भी चुके हों तो इन्हें फिर से मेरे नजरिये से देखने का लुत्फ़ उठायें।




























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