Suhag Ke Noopur
ईसा की प्रथम शताब्दी में महाकवि इलेगोवन रचित तमिल महाकाव्य शिलप्पदिकारम् पर आधारित सुहाग के नूपुर भारतीय साहित्य की एक अनमोल रचना है। इस उपन्यास की कहानी, तीन इंसानों के इर्द-गिर्द घुमती है माधवी, कोवलन और कन्नगी। माधवी रूप के बाज़ार की सबसे महँगी वेश्या है, जिस पर कावेरीपट्टनम का युवा वर्ग पूर्णरूप से मोहित है और उसे किसी भी तरह पाना चाहता है। कोवलन कावेरीपट्टनम के एक धनी व्यापारी का बेटा है, जो विदेशों से व्यापार में खूब धन कमाकर लाया है और जिसका दिल माधवी के तीखे नेत्रों से घायल हो चुका है। कन्नगी भी कावेरीपट्टनम के एक धनी व्यापारी की बेटी है, जिसका विवाह कोवलन से तय हो चुका है।
वेश्या-कुल में जन्म पाकर माधवी को सामाजिक प्रतिष्ठा कैसे मिल सकती थी? वेश्या तो पतियों के गले का मोती और पत्नियों की आँख का आँसू होती है। माधवी तरह-तरह की बातें सुनती और उसका मन चीत्कार कर उठता। वह वेश्या-कुल में जन्मी थी, लेकिन वेश्या बनना नहीं चाहती थी। उसने केवल एक पुरुष के प्रति समर्पित रहकर संसार की बड़ी से बड़ी पतिव्रता को चुनौती दी और सती नारी बनने के लिए अपने जीवन को दाँव पर लगा दिया।
इस उपन्यास में नारी के मन में छुपे अपार प्रेम, घृणा और बदले की भावना का सशक्त चित्त्रण है। इसलिए प्रसिद्ध लेखक अमृतलाल नागर का यह सर्वाधिक चर्चित एवं रोचक उपन्यास है।























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