Somnath
महमूद गजनवी द्वारा सोमनाथ मंदिर की ऐतिहासिक लूट की लोमहर्षक महागाथा, जिस पर ‘शोभा सोमनाथ की’ टीवी सीरियल बना।
सोमनाथ हिंदी के कालजयी उपन्यासों में से एक है। बहुत कम ऐतिहासिक उपन्यास इतने रोचक और लोकप्रिय हुए हैं। इसके पीछे आचार्य चतुरसेन की वर्षों की साधना, गहन अध्ययन और सबसे बढ़कर उनकी अप्रतिम लेखन-शैली है। बारह ज्योतिर्लिंगों में सोमनाथ का अग्रणी स्थान है। अन्य विदेशी आक्रमणकारियों के अतिरिक्त महमूद गजनवी ने इस प्रसिद्ध मंदिर के वैभव को सत्रह बार लूटा। पर सूर्यवंशी राजाओं के पराक्रम से वह भय भी खाता था। फिर भी लूट का यह सिलसिला सदियों तक चला। यह सब इस उपन्यास की पृष्ठभूमि है।
सोमनाथ का एक दूसरा पक्ष भी उपन्यास में जीवंत हुआ है। मंदिर के विशाल प्रांगण में गूँजती घुँघरुओं की झनकार इस जीवन की लय को ताल देती है। जीवन का यह संगीत भारत के जनमानस का संगीत है। आततायियों के नगाड़ों का शोर इसे दबा नहीं पाता। एक अजब-सी शक्ति से वह फिर-फिर उठता है और करता है एक और पुनर्निर्माण। निर्माण और विध्वंस की यही श्रृंखला इस कथा का आधार है।














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