Shabdon Ki Sargoshiyan
डॉ. कुमार मलय (डॉ. कुमार मलय झा) केंद्रीय विद्यालय के पूर्व प्राचार्य हैं। एक लेखक और कवि होने के साथ-साथ वे एक समीक्षक भी हैं। कविता, कहानी, लघु-नाटिका जैसी विधाओं में उनकी अनेक रचनाएँ हैं। इनका एक साझा संस्करण “कुछ सीप कुछ मोती” और तीन एकल काव्य-संग्रह ‘लम्हों की परछाइयाँ”, “शब्दों का यायावर” और “अहसासों के साये” प्रकाशित हैं। इनकी चौथी पुस्तक “शब्दों की सरगोशियाँ” इस समय आपके हाथों में है। इतना ही नहीं डॉ. मलय कुमार 20 से भी अधिक संकलन में सह-लेखक रह चुके हैं।
भावनाओं की अभिव्यक्ति और यथार्थ से उनका संबंध ही उन्हें प्रेरित करता है काव्य की इस यात्रा में अग्रसर रहने के लिये। इनकी कविताओं में एक ओर जहाँ रिश्तों की गहराइयाँ हैं, वहीं दूसरी ओर आसानी से टूटने वाले रिश्तों का दर्द भी है। मानवीय भावनाओं के सभी पहलू नजर आते हैं इनकी कविताओं में, जिससे पाठकों को लगता है कि उनकी ही भावनाएँ पन्नों पर उतर गई हैं। जल्द ही इनकी एक और पुस्तक आनेवाली है जो इनकी अंग्रेजी कविताओं का संकलन होगी।




























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