kafan
मुंशी प्रेमचंद द्वारा लिखित ‘कफ़न’ एक बहुचर्चित और मार्मिक कहानी है, जो 1936 में प्रकाशित हुई थी। इसे प्रेमचंद की अंतिम कहानियों में से एक माना जाता है और यह उनके साहित्यिक जीवन के यथार्थवादी चरण का उत्कृष्ट उदाहरण है। कहानी गरीबी, सामाजिक असमानता और मानवीय संवेदनाओं के पतन को गहराई से दर्शाती है। ‘कफ़न’ हिंदी साहित्य में एक मील का पत्थर मानी जाती है। यह अपने समय से आगे की कहानी है, जो आज भी प्रासंगिक है। यह हमें सोचने पर मजबूर करती है कि जब मानवीय संवेदनाएँ भुखमरी की वजह से मर जाती हैं, तो उसके लिए कौन जिम्मेदार है-व्यक्ति या वह समाज व्यवस्था, जो उसे इस हालत तक पहुँचाती है?
























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