श्री अमृतलाल वेगड़ का नर्मदा के प्रति एक विशेष लगाव है जिसके कारण वे अभी तक नर्मदा तट की 2600 किलोमीटर से अधिक की कठिन पदयात्रा कर चुके हैं। नर्मदा परिक्रमा पर आधारित उनके चित्र अनेक प्रदर्शनियों में आमंत्रित एवं पुरस्कृत हो चुके हैं। कला के साथ लेखन में भी रुचि रखने वाले श्री वेगड़ का नर्मदा-यात्रा वृत्तांत हिंदी की सभी प्रमुख पत्रिकाओं में प्रकाशित होता रहा है-अनूठे चित्रों के साथ।
यही वृत्तांत अब इस पुस्तक में बहुमूल्य रेखांकनों के साथ साद्यंत प्रकाशित हो रहा है। नर्मदा सौंदर्य के साथ-साथ नर्मदा तट के जन-जीवन की एक अंतरंग झलक भी इसमें मिलती है। पुस्तक पाठक को बांधे रखती है। इस सफलता का रहस्य इसकी हृदयग्राही शैली में निहित है। लेखक ने पाठक को अपने दल में शामिल कर लिया है और वे पाठक को अपने साथ लिए चलते हैं। लेखक के साथ-साथ पाठक भी नर्मदा परिक्रमा कर लेता है।
मध्य प्रदेश की जीवन रेखा नर्मदा पर एक स्नेहसिक्त रचना।






























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