इस काव्य-संग्रह के सन्निकट होने तक जो सहारा और प्रेरणा मिली, उसके लिए मेरा हृदय से आभार। पहले और सबसे बड़े धन्यवाद मेरे परिवार को जिन्होंने समय, धैर्य और प्रेम से इस रचना-यात्रा को सम्भव बनाया। उन अनगिनत दोस्तों और भक्तों को नमन जिनके प्रोत्साहन, सुझाव और संवेदनाओं ने इन बोलों को आकार दिया।
विशेष आभार अपने इष्ट के प्रति जिनकी आत्मीयता, सूक्ष्मता और भक्ति-भाव ने कविताओं को जीवित किया। संग्रह के तकनीकी और सम्पादन सहयोग के लिए श्रीजा पब्लिशर्स का धन्यवाद। और अंत में उन अनाम साधकों और गुरुओं को श्रद्धांजलि, जिनके अनुभवों की उर्जा इस रूप में संचित हुई। इस पुस्तक का हर शब्द उन सभी का आशीर्वाद और प्रतिबिंब है।




























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