Sher Behtar Kaise Hua
नसीम आई है शम्-ए-मज़ार गुल करने वो उस के आने से पहले ही बुझ चुकी होगी
रिमाल खैराबादी
आता
देखने के लिए आया है ज़माना उस को इक तमाशा है मुसाफ़िर भी सफ़र से पहले
अहसन मारहरवी
नौं-जवान शाइर आकाश अर्श बिला-शुब्ह इस वक़्त पूरी उर्दू दुनिया में, उर्दू ज़बान, शाई’री और दीगर साहित्यिक विधाओं और कल्चर को आत्मसात करने वाले तेज़-तरीन ज़ेहन हैं। उम्मीद है कि इस किताब से उर्दू शाईरी के संसार में कदम रखने वाले नए दिलों-दिमागों को उर्दू शाईरी की एक अहम परंपरा को समझने, शाइरी में शब्द-अर्थ के अन्दरुनी रिश्तों को जानने-पहचाने और अच्छे शेर की सौंदर्यशास्त्रीय समझ हासिल करने में बहुत मदद मिलेगी।






























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