Mai Zinda Hoon
बड़े दबंग शायर थे राहत… सच बोलते थे और डंके की चोट पर बोलते थे। ऐसे लोग अब दुनिया में कम होते जा रहे हैं। आजकल सभी नफा-नुक़सान का अन्दाज़ा लगा कर, बहुत सोच-समझ कर क़दम उठाते हैं, पर राहत ऐसे शेर-दिल शायर थे जो अपनी बात कहने से डरते नहीं थे। यूँ भी कह सकते हैं कि राहत साहब शायर भी थे और शेर भी। हिन्दुस्तान और हिन्दुस्तान के बाहर भी, जहाँ-जहाँ शायरी पर बात होगी, लोग उन्हें बरसों बरस याद करेंगे। पोएट्री की तकनीक पर जो उनकी ग्रिप थी वो कमाल थी। उनके शेरों में रिदम होती थी। शेर पढ़ने का उनका अन्दाज़ जादुई था और बावजूद इसके कि वो बिलकुल खरी बात करते थे, उनके शेर कभी तक़रीर नहीं लगते, उनमें पोएटिक वैल्यूज़ होती थीं। सबसे बड़ी बात ये है कि दुनिया के तमाम महान कलाकारों की तरह उनमें भी कुछ ज़्यादा करने, कुछ और अच्छा करने की तड़प थी। इसीलिए उन्होंने कहा भी था कि “वो दो मिसरे मैंने अब तक नहीं लिखे, जो मुझे मेरे बाद भी ज़िन्दा रखें”… लेकिन मुझे पूरा यक़ीन है कि किताबों में, रिसालों में, कभी सोशल मीडिया पर तो कभी रौशन-ख़याल लोगों के बीच राहत साहब के शेर हमेशा ज़िन्दा रहेंगे… पढ़े जाते रहेंगे और सुने जाते रहेंगे। दर-हक़ीक़त उनके शेर लोगों के दिलों पर लिखे हुए हैं और वो हमेशा वहाँ बने देंगे।






























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