Manzilen Abhi Aur Bhi Hai
व्यक्तित्व विकास के क्षेत्र में यह पुस्तक जीवन के प्रत्येक आयाम को छूती है और सफलतम उपलब्धिपूर्ण जीवन को प्राप्त करने के आधारभूत तत्वों को समाहित करती है। इसका उद्देश्य यही है कि जो अपना विकास करना चाहते हैं वे इस ज्ञान को आसान भाषा में समझ सकें तथा जीवन के अपने मुख्य लक्ष्य को सफलतापूर्वक प्राप्त कर सकें।
पुस्तक की विषयवस्तु बहुत-सी विभूतियों, विचारकों व विद्वानों के ज्ञान से आच्छादित है। यह वेदों-पुराणों, उपनिषदों से लेकर खलील जिब्रान तक, मार्केटिंग विशेषज्ञों से लेकर मानव संसाधन प्रोफेशनल्स तक की सीख व हितोपदेश पुस्तक के मंतव्य को पूरी तरह उजागर करती है।
प्रस्तुत पुस्तक व्यक्तित्व विकास के ज्ञान के आरंभिक जिज्ञासुओं को तो रास्ता दिखाएगी ही, साथ ही विद्वान पाठकों को भी संतुष्ट करेगी, चाहे वे आज व्यक्तित्व विकास और तत्व ज्ञान के किसी भी मुकाम पर क्यों न हों। अतः व्यक्तित्व विकास एवं चरित्र निर्माण पर यह पुस्तक एक उत्तम कार्यशाला है।
के. के. वर्मा के पिता स्वर्गीय नारायण जी थे जिनका कपड़े का व्यवसाय एवं खेती-बाड़ी भंवरासा, जिला देवास (म.प्र.) में थी। आपने 1954 में गृह नगर में ही भानपुरा पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य जी से गुरू मंत्र प्राप्त किया। आपने एम.ए. अंग्रेजी साहित्य से किया तथा आपका विवाह श्रीमंत तुकोजीराव पंवार (महाराजा देवास) की बड़ी पुत्री स्वर्गीय सुशीला राजे इथापे की पुत्री मधुरानी ईथापे से पारंपरिक तरीके से संपन्न हुआ। आप फार्मा सेल्स प्रमोशन व मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव के रूप में शुरूआत करने के बाद ऑल इंडिया सेल्स ऑब्जर्वर की पोस्ट के बाद जनरल मैनेजर के पद से रिटायर हुए। बाद में पैतृक कृषि कार्य करते हुए प्रस्तुत पुस्तक का संपूर्ण लेखन भी किया और वर्तमान में होई सोई जो राम रचि राखा नामक पुस्तक का लेखन कार्य जारी है।






























Reviews
There are no reviews yet.