महाभारत के प्रमुख पात्र कर्ण के जीवन पर आधारित अमर उपन्यास मृत्युंजय के बाद मराठी के सशक्त कथाकार शिवाजी सावन्त की एक और अनुपम कृति है छावा।
छावा एक बृहद् ऐतिहासिक उपन्यास है। इसमें छत्रपति शिवाजी के पुत्र महाराजा सम्भाजी के जीवन-संषर्घ का अद्भुत एवं रोमांचकारी चित्रण है। सावन्त जी की बारह वर्ष की कठिन तप-साधना और चिन्तन से ही इस कृति को यह भव्य स्वरूप प्राप्त हो सका है। जिस लगन के साथ लेखक ने इस उपन्यास के लिए पठन-पाठन और पर्यटन द्वारा सामग्री संकलित की है, वह इसे एक ऐसी प्रामाणिकता प्रदान करती है कि यह उपन्यास दुर्लभ शोध-सामग्री की विषयवस्तु भी बन गया है। महाराष्ट्र राज्य सरकार द्वारा पुरस्कृत, मराठा साम्राज्य के स्वर्णिम इतिहास को रूपाकृति देने वाला यह उपन्यास हिन्दी पाठक-जगत् में भी बहुत समादृत हुआ है।
Author: पूरा नाम: शिवाजी गोविंदराव सावंत.
जन्म : 31 अगस्त, 1940 को आजरा, जिला-कोल्हापुर (महाराष्ट्र) में।
लेखन-प्रारम्भ कविता से, किन्तु परिणति गद्य-लेखन में। वर्षों के चिन्तन-मनन के उपरान्त 27 वर्ष की अवस्था में ही प्रथम मराठी उपन्यास मृत्युंजय का प्रकाशन। यह उपन्यास उनकी लोकप्रियता का प्रतिमान बना। इसका अनुवाद अंग्रेज़ी एवं हिन्दी, गुजराती, राजस्थानी, कन्नड़, तेलुगु, मलयालम, बांग्ला आदि अनेक भाषाओं में हो चुका है। छावा (मूल मराठी में, 1989) के अतिरिक्त मृत्युंजय और छावा की कथावस्तु को ही लेकर दो नाटकों की रचना। अन्य उल्लेखनीय कृतियाँ हैं-लढत (जीवनी), शेलका साज (ललित निबन्ध); अशी मने असे नमुने, मोरावळा (रखाचित्र); युगपुरुष श्रीकृष्ण के जीवन पर केन्द्रित युगन्धर (उपन्यास)।
उनके उपन्यास मृत्युंजय, छावा, युगन्धर और नाटक संघर्ष के हिन्दी अनुवाद भारतीय ज्ञानपीठ से प्रकाशित हैं।
गुजरात राज्य सरकार का ‘साहित्य अकादमी पुरस्कार’ (1982), भारतीय ज्ञानपीठ का ‘मूर्तिदेवी पुरस्कार’ (1995), ‘आचार्य अत्रे प्रतिष्ठान पुरस्कार’, पुणे (1999) सहित अनेक पुरस्कारों से सम्मानित ।
18 सितम्बर, 2002 को मडगाँव (गोवा) में देहावसान ।






























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