Bhor Ka Deeya
यह काव्य-संग्रह कवि कुमार असीम वैभव जी की संवेदनशील और संतुलित लेखनी का सुंदर उदाहरण है। एक आईआरएस अधिकारी होने के साथ-साथ वे हिन्दी कविता के गंभीर और सजग साधक हैं। उनकी कविताओं में अनुभव, विचार और भाषा—तीनों का गहरा मेल देखने को मिलता है। इस पुस्तक की विशेषता है नई हिन्दी और पुरानी हिन्दी के बीच बना हुआ एक सधा हुआ संतुलन। यहाँ न तो भाषा बोझिल लगती है और न ही भाव हल्के—कविताएँ सहज हैं, लेकिन अर्थ में गहराई लिए हुए हैं। जीवन, समाज, समय और मनुष्य के भीतर चलने वाले संवादों को कवि ने अत्यंत प्रभावी ढंग से शब्द दिए हैं। हिन्दी पुस्तक प्रेमियों के लिए यह एक उत्कृष्ट काव्य-संग्रह है, खासकर उन नए पाठकों के लिए जो कविता की दुनिया में प्रवेश करना चाहते हैं और एक सशक्त लेकिन सरल शुरुआत ढूँढ रहे हैं।
सबसे सुन्दर अनुभूति है
किसी याद का लौटना
और अगर उससे भी कुछ सुंदर है तो
सिर्फ़ ये आशा कि
कोई लौट भी सकता है।



























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