Bhakt Ki Pratiksha
नयनों के अब नीर बहे,
तो राम नाम की गूँज लिए,
मौन पड़े अंतर्मन को,
कब तक हृदय दबाएगा,
कब तक बेबस होकर मानव,
देखे रघुवर को वन में,
राम भक्त ही तो देखो,
राम का महल बनाएगा,
राम अलंकृत आज सुसज्जित,
भक्तों के अश्रु जल से,
बरसों की प्रतीक्षा में मन,
कब तक नयन बिछाएगा, नयनों के अब नीर बहे, तो राम नाम की गूँज लिए,
मौन पड़े अंतर्मन को,
कब तक हृदय दबाएगा,
शबरी को दर्शन की आशा,
तो रघुवर कुटिया जा बैठे, आज भवन में देख राम को,
राम नाम मन गाएगा,
राम तपस्वी राम सभी के,
राम नहीं सीमित जग में,




























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