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Andheri Raat Ka Musafir

ISBN: 9789350729496 Category: Authors: , Publisher:
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150.00

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Book Condition: New
Format: Paperback
Language: Hindi
Pages: 155

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Andheri Raat Ka Musafir

मजाज की शायरी पर तो बहस हो सकती है लेकिन उनकी गैर-मामूली शोहरत के बारे में सभी आलोचक एकमत हैं। मजाज की गैर-मामूली शोहरत के कई कारण हैं। इसका एक कारण साहित्य का गैर-साहित्यिक मेयार भी है। मशहूर कहानीकार इस्मत चुग़ताई ने लिखा है कि “आहंग (मजाज का काव्य संग्रह) जब प्रकाशित हुई तो गर्ल्स कॉलेज की लड़कियाँ इसे अपने सरहाने तकियों में छिपा कर रखतीं और आपस में बैठकर पर्चियाँ निकालती थीं कि हम में से किसको मजाज अपनी दुल्हन बनाएगा।” यह एक रूमानी दौर था जिसकी नुमाइन्दगी मजाज और उनकी शायरी कर रहे थे। मजाज की इस रूमानी शायरी में जब इन्क़लावियत ने प्रवेश किया तो यह शायरी और भी आकर्षण का केन्द्र बन गयी।

मजाज की शायरी की भाषा-शैली तथा अभिव्यक्ति के तौर-तरीक़े पारम्परिक हैं। इसके बावजूद यह अपने समय की नयी और नुमाइन्दा शायरी है। प्रगतिशील सौन्दर्यशास्त्र में दिलचस्पी रखने वाले पाठक इस शायरी से अधिक आनन्द उठा सकेंगे। मजाज ने न सिर्फ़ यह कि मजदूरों, किसानों और दबे-कुचले लोगों के लिए नज़्में और गीत लिखे बल्कि उन्होंने औरतों को भी पर्दे से निकालकर इन्क़लाब का सुर्ख झंडा उठाने के लिए प्रेरित किया। इस सम्बन्ध में उनकी नज़्म ‘नौजवान ख़ातून से’ का यह शेर जो उस समय बहुत मशहूर हुआ था, आज भी प्रासंगिक है-

तेरे माथे पे ये आँचल बहुत ही खूब है लेकिन तू इस आँचल से इक परचम बना लेती तो अच्छा था।

Weight250 g
Book Condition

New

Country of Origin

India

Language

Hindi

Pages

155

Product Form

Paperback

Publishers

Vani Parkasan

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