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Andher Nagri

ISBN: 9780143482444 Category: Author: Publisher:
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Price:

150.00

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Book Condition: New
Format: Paperback
Language: Hindi
Pages: 120

Availability: In stock


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Andher Nagri 

यह भारतेंदु हरिश्चंद्र द्वारा 1881 में रचित एक प्रसिद्ध हिंदी नाटक है। यह नाटक अपनी इस लोकप्रिय पंक्ति के लिए जाना जाता है―’अंधेर नगरी, चौपट राजा। टके सेर भाजी, टके सेर खाजा।’
यह एक राजनीतिक व्यंग्य है जो विवेकहीन शासन और मूर्ख प्रशासन पर प्रहार करता है, जहाँ न्याय और अन्याय में कोई भेद नहीं होता। इसमें एक लोभी चेले (गोवर्धन दास) की कथा है, जो ऐसी नगरी में फँस जाता है जहाँ हर चीज़ का दाम एक टका होता है। अंत में, उसका गुरु अपनी बुद्धि से उसे फाँसी से बचाता है। इसे आधुनिक हिंदी नाटक का मील का पत्थर माना जाता है। यह नाटक जनता को शासन की विसंगतियों के प्रति जागरूक बनाता है। जो राजा जनता के प्रति संवेदनशील नहीं, उसके राज में सच्चे लोग मारे जाते हैं तथा धूर्त लोग फलते-फूलते हैं। तानाशाह की सत्ता है, न्याय का आडंबर होता और जनता का शोषण किया जाता है। ऐसी नगरी में गुणवान और गुणहीन लोगों में कोई भेद नहीं किया जाता।

Weight150 g
Book Condition

New

Country of Origin

India

Language

Hindi

Pages

120

Product Form

Paperback

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