Anuragini
इस संग्रह की सबसे बड़़ी शक्ति उसकी निश्छल, बेबाक
और रूह को छू लेने वाली भाषा है । कही उसं मेें राधा सी
प्रतीक्षा है, कही मीरा सी दीवानगी, तो कही आज की स्त्री
का वह मुखर स्वर जो प्रेम मेें भी अपनी अस्मिता और वेदना
को नही भूलता ।
‘अनुरागिणी’ का मर्म यही है कि सच्चा प्रेम किसी को पा
लेना नहीं, बल्कि स्वयं प्रेम हो जाना है ।

























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