ये वचन अपूर्व हैं। सीधे-सरल, पर बहुत गहरे। ये छोटी छोटी कथाएँ हैं, इनके साथ बंधी हुई ये छोटी-छोटी गाथाएँ हैं, ये तुम्हारे जीवन के बहुत से पृष्ठों को उघाड़ सकती हैं। ये तुम्हारे जीवन में नए अध्याय की शुरुआत बन सकती हैं। तुम्हारे मन पर इनकी चोट पड़ जाए, तो कोई कारण नहीं है कि तुम भी किसी दिन बुद्धत्व को क्यों न उपलब्ध हो जाओ। बुद्धत्व सबका जन्मसिद्ध अधिकार है।”
ओशो
भगवान बुद्ध की सुललित वाणी ‘धम्मपद’ पर प्रश्नोत्तर सहित पुणे में हुई सिरीज के अंतर्गत दी गई 122 OSHO Talk में से ये 10 (61 से 70) OSHO Talk हैं। इस भाग में बताया गया है कि आनंद तो जीवन का अभिन्न अंग है। जब यह तन-मन में हिलोरे ले रहा हो, तो इसके राग-संगीत से कोई वंचित नहीं रह सकता। ओशो ने बुद्ध के धम्मपद को सचमुच इस तरह खोल डाला है कि वह आत्मा में उतरे बिना नहीं रह सकता।
पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
* जीवन में व्रत का क्या मूल्य है?
* बुद्ध ने ‘संघ शरणं गच्छामि’ क्यों कहा?
* सम्यक संकल्प का क्या अर्थ है?
* बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग क्या है?
* क्या प्रेम के बिना समर्पण हो सकता है?




























Reviews
There are no reviews yet.