एक जमाना था जब रातें अपने जादू के साथ जमीन पर उतरती थीं। शाम ढले ही बच्चे अपने बुजुर्गों से कहानी सुनने के इन्तज़ार में रहते थे और रात को कहानी सुनते-सुनते नींद की आगोश में चले जाते थे। अब न वो पहली सी रातें हैं न बातें हैं। लेकिन कहानी कहने और सुनने का शौक़ किसी ज़माने में कम नहीं हुआ। ये अलग बात है कहानियाँ सुनाने के अन्दाज़ ज़रूर बदल गए हैं।
हमने इस किताब में कुछ नई और पुरानी कहानियाँ आपके लिए जमा की हैं उनमें आपको अपना और अपने बच्चों का बचपन दोनों नज़र आएँगे। बचपन की सारी शोखियाँ शरारतें, मासूमियत, तजस्सुस और फन्तासियत इन कहानियों में रची-बसी है।




























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