Geet Gita
अगर किसी सत्यशोधक ज्ञान-पिपासु को जीवन में आने वाले अनेक प्रश्नों का उत्तर एक ही स्थान पर खोजना हो तो गीता ही वह परम आकलन है या यदि कोई व्यक्ति जीवन में मात्र एक पुस्तक को पढकर सनातन धर्म की गहराईयों में परिचित होना चाहे तो वह निश्चय गीता ही है।
अथवा विश्व प्रलय से सब कुछ नष्ट होने पर भी अगर सिर्फ गीता के ज्ञान को बचा लिया जाए तो इस एक ग्रंथ से हम सभी योग, सभी वेद, सभी शास्त्र को पुनः निर्मित कर लेंगे। भगवद्गीता में मनुष्य के प्रश्न है और भगवान के उत्तर अतैव धर्म शास्त्रों में कतिपय विरोधाभास होने पर श्री गीताजी का कथन ही अंतिम निष्पति है। ”
– डॉ. तुषार दशोरा
डॉ. तुषार दशोरा जयपुर निवासी शिशु रोग चिकित्सक हैं। वे नवजात शिशु रोग विशेषज्ञ हैं एवं चिकित्सक होने के नाते उन्होंने जीवन की गहनतम अनुभूतियों को भय, रोग व मृत्यु के रूप में अनुभव किया है। भगवद्गीता सिर्फ सनातन धर्म ही नहीं अपितु सभी धर्मों में वर्णित गुह्यतम सत्य का सार्वभौम स्वरूप है। गीता सभी के लिए व सदैव के लिए है। आपने “गीताजी” का एक हिंदी काव्यत्मक अनुवाद कर इसमें वर्णित इसी सार्वभौमिक सत्य को व्यापक रूप से प्रचारित करने की चेष्टा की है। डॉ. दशोरा इससे पूर्व “स्पिरिचुअल सीक्रेट्स ऑफ़ प्रेग्नेंसी & चाइल्डबर्थ” नामक पुस्तक भी लिख चुके हैं। डॉ. दशोरा का उर्दू ग़जल व नज़्म का संग्रह “ग़फ़लत” इनके उपनाम ” ग़ाफ़िल” से प्रकाशित हुआ है।
स्वयं लेखक के शब्दों में, “इस कविता का प्रयास एक “यथामति” और “स्वांत सुखाय” प्रयास है, जो तभी सफल माना जाएगा जब यह विवेकशील पाठकों को “भगवद्गीता” पढ़ने के लिए प्रेरित करे।”



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