Shayra
शायरा’ महज़ कविताओं और नज़्मों का संग्रह नहीं, बल्कि एक स्त्री के अस्तित्व, उसकी खामोशियों, उसके अनकहे एहसासों और उसकी कलम के बीच रचा गया एक आत्मीय संवाद है।
यह उन क्षणों की दास्तान है, जब दिन की भागदौड़, ज़िम्मेदारियों और सामाजिक अपेक्षाओं के बीच स्वयं से दूर होती एक स्त्री, रात के सन्नाटे में अपनी रूह से मुख़ातिब होती है। रोज़मर्रा की ज़िंदगी के साधारण-से लम्हों में छिपे असाधारण अर्थों को तलाशती ये कविताएँ रिश्तों, प्रेम, स्त्रीत्व, आत्मसम्मान, तन्हाई और जीवन के अनगिनत रंगों को बेहद संवेदनशीलता से अभिव्यक्त करती हैं।
“जब एक स्त्री अपनी मर्ज़ी से कलम उठाती है,
तो वह महज़ नज़्म नहीं लिखती—
अपने भीतर सदियों से ठहरे एक पूरे वजूद को
पन्नों पर उतार देती है।”






























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