धम्मपद’ पर दी गई OSHO Talks का नौवाँ भाग
“बुद्ध मील के पत्थर हैं मनुष्य जाति के इतिहास में। संत तो बहुत हुए, मील के पत्थर बहुत थोड़े लोग होते हैं। कभी-कभार, करोड़ों लोगों में एकाध संत होता है, करोड़ों संतों में एकाघ मील का पत्थर होता है। मील के पत्थर का अर्थ होता है, उसके बाद फिर मनुष्य-जाति वही नहीं रह जाती। सब बदल जाता है, सब रूपांतरित हो जाता है। एक नई दृष्टि और एक नया आयाम और एक नया आकाश बुद्ध ने खोल दिया।”
ओशो
भगवान बुद्ध की सुललित वाणी ‘धम्मपद’ पर प्रश्नोत्तर सहित पुणे में हुई सिरीज के अंतर्गत दी गई 122 OSHO Talks में से ये 10 (82 से 91) OSHO Talks हैं। इस भाग में ओशो ने बुद्ध के समय की लोक प्रचलित कथाओं को समेटा है। इनके माध्यम से सहज ध्यान की कला से परिचित कराते हुए वह इस विषय में निरंतर उन्नति की ओर ले जाते हैं।
पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
* बुद्ध का मध्य शरीर, मध्य मार्ग क्या है?
* क्या न्याय और करुणा का समन्वय संभव है?
* बुद्ध का अष्टांगिक मार्ग क्या है?
* जीवन दुख है, बुद्ध का इस बात पर इतना जोर क्यों है?
* बुद्ध और फ्रायड की चिकित्सा-विधियों में मौलिक भेद क्या है?
























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