Pita Aur Putra
‘पिता और पुत्र’ नई और पुरानी पीढ़ी के आपसी सम्बन्धों की कहानी है जो उन्नीसवीं सदी के रूस में मौजूद पीढ़ीगत विभाजन और वैचारिक टकराव का जीवन्त चित्र प्रस्तुत करती है। उदारता के बावजूद पुरानी पीढ़ी पारम्परिक मूल्यों-मान्यताओं से आगे नहीं बढ़ पाती, जबकि नई पीढ़ी उन सबको चुनौती देती है। उनके मतभेदों के बहाने तुर्गेनेव सामाजिक परिवर्तन के व्यापक विषयों पर विचार करते हैं और भावी आमूल बदलाव का पूर्वाभास कराते हैं। इस उपन्यास में चित्रित समाज और पात्र इतिहास बन चुके हैं, लेकिन इसमें वर्णित पीढ़ीगत द्वन्द्व का कालातीत चित्रण आज भी किसी को उद्वेलित करने में सक्षम है।






















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