Apna Madhav
भारत माता है इस युग की देवी, दुर्गा काली इसको ही जानो असुरारि, सिंह सपूता महाकाली। गौरवमयी माता की बलशाली संतानो जागो हे विश्व चेतना की आत्मा की संतानो जागो ।…
हिन्दू की वृत्ति सर्व संग्राही, सद्विचारी हैं इसमें नहीं दैन्य दीनता, न कहीं लाचारी है। पथिक हैं जितने, राहें उतनी हो सकती हैं यह योजकता प्यारी, यह भाव उदारी है।…
छूतछात का भूत भगाकर भय हरना सर्व समाज में समता का पोषण करना है। भेदभाव की बदरंगी यह तस्वीर बनी जो प्रेम प्यार का रंग नया उसमें भरना है।….
प्रेम का धागा चाहे कच्चा, बंधन पक्का होता, इसमें कहीं भी गांठ न होती, सीधा सच्चा होता । लचकदार यह धागा, लम्बा जितना भी खींचो, निःस्वार्थ भाव से यह सबको अपना कर लेता ।…






























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