Shiksha Me Kranti
मैं ऐसी शिक्षा चाहता हूं, जहां रोज की जिंदगी ही लक्ष्य है। भविष्य कुछ है नहीं आज जो जी रहा हूं, वही सब-कुछ है। इसको जानूं, समझें, पहचानूं। और इसको पहचानने, जानने, समझने में, कैसी हवा चारों तरफ सहयोगी होगी, वह हवा हम शिक्षा संस्थाओं में दें। वह हवा वहां बनाएं। जो सच बोले, उसको हम आदर करें। चाहे सच कितना ही कठोर, चाहे सच कितना ही निर्मम, और चाहे सच कोई भी नग्नता को प्रकट करता हो, लेकिन सच आदृत होगा- सच ही आवृत होगा! सच का आदर बढ़े, सच की प्रतिष्ठा हो, और सच कैसे समझा जाए और कैसे हम पहचानें कि कहां हम झूठ को पकड़ते हैं, क्यों पकड़ते हैं, उसकी समझ, उसकी पहचान बढ़ने की सारी साधनाएं पहले दिन से शिक्षा के। न भूगोल इतनी महत्वपूर्ण है, न गणित, न केमिस्ट्री, न फिजिक्स, जितनी एक मेडिटेटिव अवेयरनेस, ध्यानपूर्ण चित्त जो कि एक-एक चित्त को। आज जो चित्त है, उसको समझने में सहयोगी बनता चला जाए। और मजा यह है कि जितनी हमारी गहरे में समझ बढ़ती है, उतना ही रूपांतरण हो जाता है।
समझ साधन है और समझ से बड़ा कोई साधन नहीं है।
-ओशो
पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
क्या है अविद्या और क्या है विद्या ?
जीवन का प्रयोजन क्या है?
शिक्षक का कर्तव्य क्या है?
विद्रोह से क्या अर्थ है ?
प्रेम-केंद्रित शिक्षा के सूत्र
नई मनुष्यता के जन्म के आधारभूत सूत्र
नई पीढ़ी को कैसे शिक्षित किया जाए ?
नई शिक्षा के आधारभूत सूत्र
सूचना देने का काम ही क्या शिक्षा का काम है?
शिक्षाः स्मृति की नहीं, बुद्धिमत्ता की




























Reviews
There are no reviews yet.