Vikash Gatha
14 अगस्त 1947, रात्रि 12:00 बजे कराची में हड़कंप और आतंक का साया था। उसी रात एक घर की विशाल छत पर बड़ी संख्या में सेविकाएँ अपनी संगठन प्रमुख, वंदनीय मौसी जी लक्ष्मीबाई केलकर से मार्गदर्शन प्राप्त करने के लिए एकत्रित हुई। उसी स्थान पर भगवा ध्वज को साक्षी मानकर सिंध की सेविकाओं ने तन-मन-धन से भारत माता के लिए पूर्ण रूप से समर्पित रहने का संकल्प लिया। विभाजन के उस दौर में यह कल्पना से भी परे था कि दो महिलाएँ कराची जाएँ और सेविकाओं को राष्ट्रहित में समर्पण का भाव सिखाएँ। राष्ट्र सेविका समिति का गठन वर्ष 1936 में विजयादशमी के दिन वर्धा में हुआ और दिल्ली प्रांत में समिति कार्य 1960 में प्रारंभ हुआ। समर्पण भाव से कार्य में लगी सेविकाएँ और प्रचारिकाएँ ही संगठन का आधार हैं। इस पुस्तक में आपको 65 वर्षों के दौरान समिति सेविकाओं की संख्या, कार्य के व्यापक विस्तार, सेविकाओं के वर्षों के संघर्ष, जिजीविषा की कहानी भी देखने को मिलेगी। इस पुस्तक में जीजा माता स्मृति दिवस, 1996 समारोह, प्रेरणा शिविर व कोरोना वायरस महामारी के समय में राष्ट्र सेविका समिति द्वारा किए कार्यों का लेखा-जोखा है। तो प्रस्तुत है आपके समक्ष महिला सशक्तिकरण की पुरोधा, राष्ट्र सेविका समिति दिल्ली प्रांत का इतिहास जो वर्ष 1960 से 2025 तक की अपनी यात्रा का साक्षी बनने के लिए आपको सादर आमंत्रित करता है।






























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