धम्मपद’ पर दी गई OSHO Talks का प्रथम भाग
“मैं इन ‘धम्मपद’ के वचनों को तराश रहा हूँ, तुम्हारे योग्य बना रहा हूँ। यह धम्मपद का पुनर्जन्म है। यह धम्मपद को नई भाषा, नया अर्थ, नई भंगिमा, नई देह, नए प्राण देने का प्रयास है और जब फिर से जन्म हो जाए धम्मपद का, जैसे बुद्ध आज बोल रहे हों, तभी तुम्हारी आत्मा में संवेग होगा, तभी तुम्हारी आत्मा में रोमांच होगा। तभी तुम आंदोलित होओगे। तभी तुम कांपोगे-डोलोगे।”
ओशो
भगवान बुद्ध की सुललित वाणी ‘धम्मपद’ पर प्रश्नोत्तर सहित पुणे में हुई सिरीज के अंतर्गत दी गई 122 OSHO Talks में से ये 10 (01 से 10) OSHO Talks हैं। इसमें ओशो ने दुख को रेखांकित किया है। वह भीतर के दुख की बात करते हुए व्यक्ति के ‘खुद’ को कारण बताते हैं। इसी तरह सुख के लिए भी व्यक्ति को ही कारण मानने पर जोर देते हैं। इसे बाहर से तोलने को उन्होंने धोखा बताया।
पुस्तक के कुछ मुख्य विषय-बिंदुः
* बुद्ध की मनोचिकित्सा और आज की पश्चिमी मनोचिकित्सा में क्या भेद है?
* आज का मनोविज्ञान क्या कभी धर्म की खोज में पहुंच पाएगा?
* वर्तमान में जीने की बजाय भविष्य की कल्पना में जीना ज्यादा सुखद लगता है। तो क्या करें?
* बुद्ध के शून्य में आप प्रेम क्यों कर जोड़ रहे हैं?











Reviews
There are no reviews yet.